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Saturday, July 6, 2013

Astrology and house yog

 ज्योतिष शास्त्र में भवन विचार :
१ ज्योतिष शास्त्र में भवन सम्बन्धी प्रशन का विचार जन्मकुंडली के चतुर्थ भाव से किया जाता है! यदि कुंडली के चतुर्थ भाव का अधिपति चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति को भाव सुख की प्राप्ति होती है!
२ यदि चतुर्थ भाव का अधिपति लग्न भाव में स्थित हो और लग्न भाव का अधिपति चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति को भवन का सुख प्राप्त होता है !
३ यदि चतुर्थ भाव का अधिपति सप्तम भाव में स्थित हो और उस पर लग्नेश की पूर्ण प्रभाव हो तो ऐसे व्यक्ति को भवन का सुख पत्नी अथवा  ससुराल के माध्यम से प्राप्त होता है !
४ यदि चतुर्थ भाव का अधिपति और लग्न भाव का अधिपति एकसाथ स्थित हो तो ऐसा व्यक्ति स्वयं भाव का सुख प्राप्त करता है!
५ यदि चतुर्थ भाव का अधिपति और दशम भाव का अधिपति एकसाथ चतुर्थ अथवा दशम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति को पिता अथवा राज्य पक्ष की और से भवन सुख की प्राप्ति होती है!

Tuesday, July 2, 2013

jyotish aur santan vilamb ke santan yog

विलम्ब से संतान प्राप्ति :
१- यदि किसे व्यक्ति की जन्म कुंडली में सप्तम भाव का अधिपति तीन, छ, आठ और बहर्वे भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति को विलम्ब से संतान प्राप्ति होती है !
२ यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में पंचम भाव का अधिपति पापग्रह और शुभ ग्रह के साथ स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति को संतान विलम्ब से प्राप्त होती है !
३- यदि कुंडली में पंचम भाव का अधिपति शुभ ग्रह के साथ अशुभ भावों में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति को संतान सुख विलम्ब का प्राप्त होता है !
४- यदि पंचम भाव का अधिपति शुभ भावों में स्थित हो और पंचम भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव हो तो भी वियक्ति को संतान विलम्ब से प्राप्त होती है !
५- पंचम भाव पर तीन[ छ आठवे भाव का अधिपत का प्रभाव हो और पंचम भाव का अधिपति शुभ भाव में हो तो व्यक्ति को संतान विलम्ब से प्राप्त होती है !

Monday, July 1, 2013

Jyotish and disease

 ज्योतिष शास्त्र में रोग विचार 
७- यदि छठे  भाव का अधिपति उसी भाव में स्थित हो तो ऐसे जातक सो जांघ सम्बन्धी रोग  होने का भय रहता है !
८- यदि  छठे भाव का अधिपति सप्तम भाव में स्थित हो तो ऐसे जातक को गुप्त रोग होने का भय रहता है !
९- यदि छठवे भाव का अधिपति अस्ठ्म भाव में स्थित हो तो ऐसे जातक  को अंड कोष सम्बन्धी रोग का सामना करना पड़ता है !
१ ० - यदि छठवे भाव का अधिप