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Friday, October 18, 2013

प्रेम विवाह योग:


१ यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में लग्नेश सप्तम भाव मव स्थित हो और सप्तमेश लग्न भाव में स्थित हो तो ऐसे जातक का प्रेम विवाह होता है !  अर्थात ऐसा जातक अपने जीवनसाथी का चयन स्वयं करता है, आगे चलकर उसे अपने माता एवम संबंधियों की भी स्वीकृति भी मिल जाती है !
२ पंचम में मंगल, पंचमेश के साथ युति करता हो तो भी ऐसे जातक का प्रेम विवाह होता है !
३ शुक्र लग्न में लग्न भाव के स्वामी  का साथ स्थित हो तो भी ऐसा जातक प्रेम विवाह करता है !
४- शुक्र सप्तम भाव में सप्तमेश के साथ  स्थित हो तो भी ऐसे जातक का प्रेम विवाह होता है !
५ शुक्र सप्तम भाव में स्वग्रही अथवा उच्च का हो तो ऐसा जातक का प्रेम विवाह होता है !

Wednesday, October 16, 2013

ज्योतिष शास्त्र में कर्ज योग :


१ जन्मकुंडली में छठे भाव को कर्ज का मन जाता है ! यदि किसी जातक की कुंडली में छठवे भाव के अधिपति का  छटवे भाव से छटवे भाव के अधिपति के किसी भी प्रकार से सम्बन्ध स्थापित हो जाये तो ऐसा जातक आजीवन कर्जदार रहता है !
२ यदि धन भाव में पापग्रह स्थित हो, लग्नेश बारहवे भाव में स्थित हो तो ऐसा जातक कर्जदार रहता है !
३ यदि धन भाव का अधिपति अपनी नीच राशी में स्थित हो  और छटवे भाव पर शुभ ग्रह का प्रभाव हो तो ऐसा जातक आजीवन कर्जदार रहता है !
४ छटवे भाव का अधिपति शनि के साथ स्थित हो अथवा शनि से उसका किसी भी प्रकार का सम्बन्ध स्थापित हो जाये तो ऐसा जातक कर्जदार रहता है !

ज्योतिष शास्त्र में गायक योग :


१- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में मिथुन अथवा कन्या लग्न हो और लग्नेश बुध चतुर्थ भाव में स्थित हो और उसके साथ गुरु भी स्थति हो तो ऐसा जातक गायन कला में निपुण होता है !
२- लग्नेश बुध और चतुर्थ भाव का अधिपति गुरु लग्न पंचम नवम भाव में स्थित हो तो ऐसा जातक गायन कला में निपुण होता है
३- यदि गुरु बुध और शुक्र की युति लग्न चतुर्थ पंचम  सप्तम नवम और दशम भाव में स्थित हो तो ऐसा जातक गायन कला के माध्यम से प्रसिधी को प्राप्त करता है !
४-  धनु और मीन लग्न में लग्नेश गुरु और चतुर्थ भाव का अधिपति केन्द्र्य भावों में स्थति हो और शुक्र लग्न पंचम नवम भाव में स्थित हो तो ऐसा जातक गायन कला में निपुण होता है !

Tuesday, October 15, 2013

ज्योतिष शास्त्र में अचानक धन नाश योग :


१ यदि दुसरे भाव  भाव  में कर्क का चंद्रमा शनि के नक्षत्र में स्थित हो अथवा दोनों में सम्बन्ध स्थापित हो तो ऐसे व्यक्ति के समस्त धन का नाश हो जाता है!
२- शनि की महादशा में चंद्रमा की अंतरदशा आने पर जातक का समस्त धन नष्ट हो जाता है !
३- यदि लग्नेश अष्टम भाव में स्थित हो और बहरवे  भाव का अधिपति भी उसके साथ हो, छठे भाव का स्वामी लग्न भाव में स्थित हो !
४- नवम भाव का अधिपति और दशम भाव भाव का अधिपति बहरवे  भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति का समस्त धन अचानक ही नस्ट हो जाता है !