Dr. Brahamadutt. Sharma Ph.D. (Astrology) Ph.D. (Political science) M.A., M.Phil., NET., LL.B., D.H.T www.brahmjyotish.com Author of Books: 1. Bharitya Jyotish 2. Jyotish Vigyan 3. Jyotish Shastra me prashan vichar 4. Naw graham avm santi upya 5. Gandhi avm bharitya rashtrawad 6. Gandhi chintan me rashtrawad 7. Gandhi ka rajnatik chintan 8. Kotillya ka rajnatik chintan 9. Rajaram Mohan Roy 10. Arvind ghosh and Nehru Mob: 09314878977, 09351593577
Tuesday, August 6, 2013
Saturday, July 20, 2013
ज्योतिष शास्त्र में गले सम्बन्धी रोग :
ज्योतिष शास्त्र में गले सम्बन्धी रोग :
१- यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली के तीसरे भाव में पापग्रह स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति तो गले सम्बन्धी रोग होने का भय रहता है !
२- तीसरे भाव का अधिपति बुध के साथ छठवे भाव में स्थित हो !
३ - केंद्र या त्रिकोण भावों में राहु स्थित हो तो गले सम्बन्धी रोग होता है !
४- सूर्य के साथ रहू त्रिक भावों में स्थित हो तो व्यक्ति को गले सम्बन्धी रोग होने का रोग होता है !
५ - चंद्रमा के साथ लग्नेश त्रिक भावों में स्थित हो तो व्यक्ति को गले सम्बन्धी रोग होता है !
६ - सूर्य की महादशा में शुक्र की अंतरदशा हो तो ऐसे समय व्यक्ति को गले सम्बन्धी रोग होने का भय रहता है !
७ - तीसरे भाव में नीच राशिगत शत्रुराशिगत या अस्त ग्रह हो तथा उसे पापग्रह देखते हो तो व्यक्ति को गले सम्बंची रोग होने का भय रहता है !
Dr. Brahamadutt sharma
www.brahmjyotish.com
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Friday, July 19, 2013
ज्योतिष एवं दन्त रोग :
ज्योतिष एवं दन्त रोग :
१ यदि किसी व्यक्ति के छठवे भाव में राहु अथवा केतु स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति को दन्त सम्बन्धी रोग होने का भय रहता है !
२ यदि लग्न में मेष वृष या धनु राशी स्थति हो और उसपर पापग्रहो का प्रभाव हो तो व्यक्ति को पायरिया रोग होता है !
३ यदि बारहवे भाव में चंद्रमा त्रिकोण भावों में शनि तथा सप्तम या आठवे भाव में सूर्य स्थति हो तो व्यक्ति को दन्त सम्बन्धी रोग होने का भय रहता है !
४ यदि द्वितीय भाव का अधिपति राहु के साथ त्रिक भावों में शनि स्थति हो !
५ लग्न भाव में गुरु और राहु स्थित हो तो व्यक्ति को दन्त रोग होने सा भय रहता है !
६ सप्तम भाव में पापग्रह हो तथा उन पर पापग्रहो का प्रभाव हो !
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१ यदि किसी व्यक्ति के छठवे भाव में राहु अथवा केतु स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति को दन्त सम्बन्धी रोग होने का भय रहता है !
२ यदि लग्न में मेष वृष या धनु राशी स्थति हो और उसपर पापग्रहो का प्रभाव हो तो व्यक्ति को पायरिया रोग होता है !
३ यदि बारहवे भाव में चंद्रमा त्रिकोण भावों में शनि तथा सप्तम या आठवे भाव में सूर्य स्थति हो तो व्यक्ति को दन्त सम्बन्धी रोग होने का भय रहता है !
४ यदि द्वितीय भाव का अधिपति राहु के साथ त्रिक भावों में शनि स्थति हो !
५ लग्न भाव में गुरु और राहु स्थित हो तो व्यक्ति को दन्त रोग होने सा भय रहता है !
६ सप्तम भाव में पापग्रह हो तथा उन पर पापग्रहो का प्रभाव हो !
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Thursday, July 18, 2013
ज्योतिष शास्त्र में नपुंसकता योग :
ज्योतिष शास्त्र में नपुंसकता योग :
१ विषम राशी स्थित में स्थित सूर्य और चंद्रमा एक दुसरे को देखते हो तो व्यक्ति को नपुंसकता रोग होता हिया !
२ यदि विषम राशी में बुध तथा सम्राशी में चंद्रमा और दोनों को मंगल ग्रह देखता हो तो व्यक्ति को नपुंसकता का रोग होता है !
३ यदि विषम राशी में स्थित शनि और बुध एक दुसरे को देखते हो !
४ यदि विषम राशी में स्थित मंगल लग्न एवम चंद्रमा को देखता हो !
५ यदि विषम राशिगत मंगल सम्रशिगत सूर्य को देखता हो !
१ विषम राशी स्थित में स्थित सूर्य और चंद्रमा एक दुसरे को देखते हो तो व्यक्ति को नपुंसकता रोग होता हिया !
२ यदि विषम राशी में बुध तथा सम्राशी में चंद्रमा और दोनों को मंगल ग्रह देखता हो तो व्यक्ति को नपुंसकता का रोग होता है !
३ यदि विषम राशी में स्थित शनि और बुध एक दुसरे को देखते हो !
४ यदि विषम राशी में स्थित मंगल लग्न एवम चंद्रमा को देखता हो !
५ यदि विषम राशिगत मंगल सम्रशिगत सूर्य को देखता हो !
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